कान्स फिल्म फेस्टिवल के दौरान मीडिया को पोज देते हुए कंगना रनोट, डेब्यू के बाद नहीं थे मेरे पास काम

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बॉलीवुड- कंगना रनोट 72वें कान्स फिल्म फेस्टिवल में शामिल होने फ्रेंच रिवेरा (फ्रांस) पहुंच चुकी हैं। गुरुवार को रेड कार्पेट पर वॉक करने के लिए उन्होंने डिजाइनर फाल्गुनी और शेन पीकॉक की कांजीवरम साड़ी पहनी। इसके अलावा, जब कान्स के बाद हुई पार्टी में वो शामिल हुईं तो Nedret Taciroglu के बोल्ड सूट में दिखाई दीं। उनके लुक्स की फोटोज सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं।

– इस मौके पर कंगना ने मीडिया से बात की और कहा कि पिछले कुछ सालों में बॉलीवुड काफी बदल चुका है। उनके मुताबिक, एक्ट्रेसेस अब रूढ़ीवाद से बाहर निकल कर अपनी जगह खुद बना सकती हैं।

– बकौल कंगना, “आज मैं देख सकती हूं कि कई ऐसी एक्ट्रेसेस हैं, जिन्हें डांस नहीं आता। लेकिन वो सक्सेसफुल करियर बना सकती हैं। या अगर आप डांसर हैं तो इसे सतत रख सकते हैं। लेकिन मैंने पिछले एक-दो सालों में महसूस किया है कि कई महिलाओं ने सिनेमा में वापसी की है। फिर चाहे नीना गुप्ता हों या फिर माधुरी दीक्षित। जो चीजें हो रही हैं, वह मेनस्ट्रीम की नहीं हैं। लेकिन कम से कम कुछ उदाहरण तो सामने आए और इसमें कुछ कुछ भी गलत नहीं है।”

कंगना ने आगे कहा, “जब मैंने करियर की शुरुआत की तो काफी मजबूत डेब्यू के बाद मेरे पास लंबे वक्त तक कोई काम नहीं था। क्योंकि मैं उन भूमिकाओं में फिट नहीं बैठ पाती थी, जो उस समय लोकप्रिय थीं। लेकिन अब मैं कई लोगों और एक्ट्रेसेस को देखती हूं, जो आते हैं और अपने लिए कुछ कैटेगरीज ढूंढ लेते हैं। अब यहां कई तरह की कैटेगरीज हैं। डांस न आने पर भी अच्छा सिनेमा कर सकते हैं। जैसे मुझे नाचना नहीं आता और यह वाकई बहुत बड़ी डील है। मैं लड़ सकती हूं, कुछ भी कर सकती हूं, लेकिन डांस में अच्छी नहीं हूं।”

– कंगना रनोट ने राष्ट्रवाद पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा, “मैं नहीं जानती कि आखिर कब और कैसे राष्ट्रवादी होना और उदार होना दो अलग-अलग चीजें बन गईं। क्योंकि राष्ट्रवाद प्रकृति में अध्यात्म की तरह है। जब आप किसी को पहचानते हैं, किसी से प्यार करने लगते हैं तो आपके अंदर उसके प्रति अलग ही भाव आने लगते हैं। आप उसे अपने में शामिल करने लगते हैं और महसूस करने लगते हैं।”

कान्स फिल्म फेस्टिवल के दौरान कंगना रनोट।
“जब किसी ग्रुप को पहचानने लगते हैं तो वो आपकी फैमिली बन जाते हैं। फिर आप अपने गांव और अपने जाति के लोगों को पहचानने लगते हैं। यह समावेशिता के अनुभव को बढ़ाता है। इसलिए राष्ट्रवाद और कुछ नहीं, बल्कि ऐसे सभी लोगों की पहचान है, जिन्होंने एक ही संविधान के अंतर्गत रहने या एक जैसा पासपोर्ट रखने की शपथ ली है। या जिन्होंने एक ही भूमि की रक्षा की प्रतिज्ञा ली है। यह आपके विस्तृत परिवार के अलावा और कुछ नहीं।”